The Green: Mile In Hindi
अगर आपने कभी कोई फिल्म देखने के बाद महसूस किया है कि आपकी आत्मा हिल गई है, तो वह फिल्म है 1999 में बनी द ग्रीन माइल । फ्रैंक दाराबोंट द्वारा निर्देशित और स्टीफन किंग के उपन्यास पर आधारित, यह फिल्म सिर्फ एक जेल ड्रामा नहीं है। यह इंसानियत, जज्बातों और उस चमत्कार की कहानी है जिसे हम समझ नहीं पाते।
अगर आपने यह फिल्म नहीं देखी है, तो आज ही रात इसे लगाइए। पर साथ में टिश्यू का एक पैकेट जरूर रखिएगा। the green mile in hindi
द ग्रीन माइल: सिर्फ एक फिल्म नहीं, एक एहसास (The Green Mile: Not Just a Film, a Feeling) जॉन कॉफी कहता है
भारतीय दर्शकों के लिए, यह फिल्म हमारे अपने महाकाव्यों और कहानियों से मेल खाती है। जॉन कॉफी का चरित्र हमें याद दिलाता है कि सच्ची पवित्रता कभी-कभी सबसे असंभव शरीर में रहती है। फिल्म का सबसे दिलचस्प सीन है—जब जॉन कॉफी जेलर की पत्नी की बीमारी ठीक करता है। वह दृश्य आपको रुला देगा। "आई एम टायर्ड
फिल्म की असली ताकत है टॉम हैंक्स का किरदार पॉल एजकॉम्ब (जेलर) और माइकल क्लार्क डंकन का किरदार जॉन कॉफी। जॉन कॉफी एक विशालकाय कद-काठी वाला काला व्यक्ति है, जिसे दो छोटी लड़कियों की हत्या के आरोप में मौत की सजा सुनाई गई है। लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, हमें पता चलता है कि जॉन कॉफी न सिर्फ दोषी है, बल्कि वह एक ईश्वरीय चमत्कार है—जो लोगों को ठीक कर सकता है, दर्द को अवशोषित कर सकता है, और दूसरों की पीड़ा को महसूस कर सकता है।
फिल्म के अंत में, जॉन कॉफी कहता है, "आई एम टायर्ड, बॉस।" वह दुनिया की सारी बुराई और दर्द को अपने अंदर लेकर थक चुका है। वह इतना पवित्र है कि इस पापी दुनिया में जीना उसके लिए यातना है। यह लाइन फिल्म का सबसे गहरा संदेश है: क्या इस दुनिया में अच्छे लोगों को ही सबसे ज्यादा कष्ट सहना पड़ता है?